मत रुक यहाँ , तेरा घर कही और है ....
इन्तजार में तेरे कोई तो जरुर है ....!
राहे मोहताज नहीं तेरी , क्यों इतना गुरुर है ....
रुक जायेगा गर यही तो एक अफसाना जरुर है....!
क्यों रुसवा है वक्त नादान है ...
बदलेगा एक दिन समझ ले , नहीं विरासत में मिली कोई आन है ...!
पहचान ले और रख कदम क्यों इतना वीरान है ...
पदचाप की आहाट में भी एक शान है...!
ढलती शाम गुजरे वक्त को याद दिलाएगी ...
नहीं संभल पाया तो फिर काली रात आएगी...!
हो जायेगा मजबूर तू इस बार...
लेकिन पता है मुझे तू नहीं माने इस तरह हार...!
Friday, May 7, 2010
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nice one dil ko chu gayee
ReplyDeletenice poem.
ReplyDeletekeep it up.
nice poem.
ReplyDeletegood keep it up.
Achchhi Hai but topi kahan se hai?
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