तेरे आगोश में लेले मुझे , मै फिर रोना चाहता हूँ माँ .......!
वो कोमल हाथो तलें फिर सोना चाहता हूँ माँ ...!!
ये किलकारियां भरते परिंदे ,सुबह- सुबह तेरी याद दिला देतें है.......!
लगाता है सोया नहीं कई दिनों से , ऐसा अहसास जगा देतें है...!!
वो पावन पवित्र सा तेरा अहसास ,अब भी झन्झकोर जाता है.....!
नहीं रह सकता हर वक्त तेरे पास , बस दिल रो कर रह जाता है ....!!
क्यों बेबस हो गया वक्त से मै , माँ बता मुझे ....?
ये कैसा विधि का विधान है ,समझ तो आया होगा तुझे .....!!
महसूस होता है तेरा प्यार मुझे, हवा सा कलेजे मै उतर रहा है......!
हर बार की तरह आज फिर तेरा लाल ,आँखे नम किये ऑफिस जा रहा है.....!!
Sunday, May 9, 2010
Subscribe to:
Post Comments (Atom)
Excellent dude .....
ReplyDeletevery good yaar.. really touching.
ReplyDeleteGood one....keep it up....
ReplyDelete